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कर्पूर चन्द्र कुलिश शोध संस्थान की स्थापना

राजस्थान विद्यापीठ में पत्रकारिता, वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना को समर्पित “कर्पूर चन्द्र कुलिश शोध संस्थान” की स्थापना एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आई।

समारोह से पूर्व विद्यापीठ के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।

प्रतापनगर स्थित परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में राजस्थान पत्रिका के प्रधान सम्पादक डॉ. गुलाब कोठारी ने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और शासन के बीच एक सशक्त सेतु है। यदि पत्रकारिता सत्ता के साथ खड़ी दिखाई देने लगे, तो समाज की पीड़ा और वास्तविक समस्याएँ शासन तक प्रभावी रूप से नहीं पहुँच पाएंगी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता समाज की आवाज और लोकतंत्र का धर्म है तथा पाठक और समाज का विश्वास ही पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी है।

डॉ. गुलाब कोठारी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता किसी व्यक्ति विशेष की संपत्ति नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से जुड़ा व्यापक सामाजिक दायित्व है। उन्होंने पत्रकारिता को संवेदनशीलता, जनहित, नैतिकता और आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम बताते हुए कहा कि आधुनिक शिक्षा ने मनुष्य को बुद्धि से तो जोड़ दिया है, लेकिन संवेदनाओं से दूरी बढ़ने के कारण जीवन-मूल्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में पत्रकारिता को अधिक संवेदनशील और समाजोन्मुख बनने की आवश्यकता है।

कुलपति प्रो. कर्नल (मानद) एस.एस. सारंगदेवोत ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि शोध संस्थान में कर्पूर चन्द्र कुलिश के साहित्य, पत्रकारिता, विचारधारा एवं जीवन यात्रा से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, पुस्तकें तथा संस्मरणों का संग्रह रखा जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय पत्रकारिता के मूल्यों, सामाजिक सरोकारों तथा राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।

इस अवसर पर कपूर चंद्र कुलिश के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए कहा गया कि उन्होंने पत्रकारिता को जनसेवा, वैचारिक स्वतंत्रता और सामाजिक सरोकारों से जोड़ा। उनकी निर्भीक लेखनी, जनहितकारी दृष्टि और मूल्यों आधारित पत्रकारिता ने समाज में नई चेतना का संचार किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचार नहीं, बल्कि विचार, संकल्प, दर्शन और समाज की चेतना की प्रभावी अभिव्यक्ति है।

कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि यह शोध संस्थान भावी पीढ़ियों के वैचारिक विकास का केंद्र बनेगा। उन्होंने कर्पूर चन्द्र कुलिश के जीवन को संघर्ष, संकल्प और निर्भीक पत्रकारिता का प्रेरक उदाहरण बताते हुए कहा कि उनकी लेखनी ने समाज में नई चेतना का संचार किया। उन्होंने लोकभाषा, ग्रामीण पत्रकारिता, भारतीय मूल्यों और शोधपरक चिंतन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में कर्पूर चन्द्र कुलिश की जीवन यात्रा पर आधारित संस्मरण डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया तथा छात्राओं द्वारा घूमर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति दी गई। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा एवं डॉ. सिद्धिमा शर्मा ने किया, जबकि आभार डॉ. तरूण श्रीमाली ने व्यक्त किया।

इस अवसर पर जिला कलक्टर डॉ. गौरव अग्रवाल, निहार कोठारी, सिद्धार्थ कोठारी, कोमल कोठारी, डॉ. आनंद गुप्ता, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली, डॉ. विपिन माथुर, प्रो. जीएम मेहता, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. युवराज सिंह राठौड़, प्रताप भंडारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, कांग्रेस नेता पंकज शर्मा, समाजसेवी हरीश राजानी, भंवर सेठ, कवि अजातशत्रु, राजेश अग्रवाल, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. मलय पानेरी, प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, प्रो. कला मुणेत, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. मंजु मांडोत, डॉ. एसबी नागर, प्रो. धीरज प्रकाश जोशी, डॉ. भवानीपाल सिंह राठौड, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. बलिदान जैन, प्रो. अमी राठौड़, डॉ. सुनिता मुर्डिया, प्रो. रचना राठौड़, डॉ. हिना खान, डॉ. नीरू राठौड़, डॉ. लिली जैन, डॉ. मधु मुर्डिया, डॉ. दिनेश श्रीमाली, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, डॉ. सपना श्रीमाली सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर, कार्यकर्ता एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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