AIU वेस्ट जोन वाइस चांसलर्स सम्मेलन का भव्य शुभारंभ
राजस्थान विद्यापीठ की मेजबानी में “स्वदेशी, आर्थिक एवं तकनीकी राष्ट्रवाद” विषय पर आयोजित दो दिवसीय वेस्ट जोन वाइस चांसलर्स सम्मेलन का उदयपुर में भव्य शुभारंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित पश्चिमी भारत के 150 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षाविद और शिक्षा नीति विशेषज्ञ एक मंच पर एकत्र होकर स्वदेशी, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण पर मंथन कर रहे हैं।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसनराव बागडे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पुरातन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम ही सशक्त भारत की नींव है। उन्होंने विद्यार्थियों के समग्र विकास पर बल देते हुए कहा कि कौशल, संस्कार और विज्ञान से ही राष्ट्रनिर्माता पीढ़ी तैयार होगी। उन्होंने औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली को शिक्षित बेरोजगारी का कारण बताते हुए शिक्षा को जीवनोपयोगी और राष्ट्रोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा शिक्षा को गरीबी उन्मूलन का सबसे बड़ा साधन बताया। शिक्षकों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षक असीम क्षमताओं से युक्त हैं और उन्हें अपनी शक्ति को पहचानकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। हालाँकि, शिक्षकों को उन उन शक्तियों को याद दिलाए जाने की आवश्यकता है और आज मैं रामायण के जाम्बवत की भूमिका निभाते हुए शिक्षकों को उनकी क्षमताओं की स्मृति जागृत कर रहा हूँ, ताकि वे हनुमान की ही तरह असंभव और विराट कार्य भी आसानी से पूरे कर सकें।
महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री प्रो. मंजू बाघमार ने स्वदेशी, नवाचार और अनुसंधान को भारत की वैश्विक पहचान का आधार बताते हुए कहा कि सजग नागरिक निर्णय, शोध और नवाचार से ही राष्ट्र सशक्त बनता है।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने शिक्षा को समाज से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री प्रदान करने वाले केंद्र न बनकर सामाजिक परिवर्तन के वाहक बनना होगा। उन्होंने सहकारिता, कौशल और नवाचार के समन्वय को सशक्त भारत की आधारशिला बताया तथा कहा कि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वावलंबन की भावना विकसित करना आवश्यक है।
कुलाधिपति श्री भंवर लाल गुर्जर ने संस्थान की विकास यात्रा साझा करते हुए वंचित वर्ग तक शिक्षा पहुँचाने के संकल्प को दोहराया।
एआईयू के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, नवाचार आधारित शिक्षा और उत्पाद निर्माण को उच्च शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति के सदस्य प्रो. गौरव वल्लभ ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता अनिवार्य बताते हुए स्वदेशी उत्पादन और अनुसंधान आधारित शिक्षा को आत्मनिर्भर भारत का मूल आधार कहा।
एआईयू की महासचिव डॉ. पंकज मित्तल ने एआईयू की कार्यप्रणाली, विश्वविद्यालयों के अंतरराष्ट्रीयकरण और स्वदेशी शिक्षा के विस्तार की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही भारतीय विद्यार्थियों के वैश्विक प्रवाह पर प्रकाश डालते हुए स्वदेशी शिक्षा के विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित किया।
सम्मेलन के दौरान “यूनिवर्सिटी न्यूज” के विशेषांक का विमोचन किया गया।
आयोजन सचिव प्रो. युवराज सिंह राठौड़ ने बताया कि विभिन्न तकनीकी सत्रों में स्वदेशी शिक्षा व्यवस्था के पुनर्रचना, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप इकोसिस्टम और उद्योग–शिक्षा साझेदारी जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।




