वायुमंडलीय भौतिकी एवं पर्यावरणीय निगरानी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार संपन्न
राजस्थान विद्यापीठ की संघटक इकाई विज्ञान संकाय के फिजिक्स विभाग द्वारा प्रतापनगर स्थित कुलपति सचिवालय सभागार में “वायुमंडलीय भौतिकी एवं पर्यावरणीय निगरानी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमीनार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सेमीनार में पर्यावरण संरक्षण, मौसम विज्ञान, भारतीय ज्ञान परम्परा तथा आधुनिक तकनीक और AI के प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि आधुनिक युग में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का तेजी से विस्तार हो रहा है, लेकिन कोई भी तकनीक मानवीय संवेदनाओं का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने स्वयं के ज्ञान और चिंतन से अधिक एआई पर विश्वास करने लगा है, जिससे उसकी सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि तकनीक का उपयोग केवल साधन के रूप में करें, अपनी बौद्धिक क्षमता के विकल्प के रूप में नहीं।
प्रो. सारंगदेवोत ने भारतीय ज्ञान परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी परम्पराओं में प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की शिक्षा दी गई है। वर्तमान पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पारंपरिक ज्ञान को अपनाना भी आवश्यक है।
मुख्य अतिथि कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि वैश्विक युद्धों और औद्योगिक गतिविधियों के कारण तापमान में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिसका प्रभाव पूरे विश्व के पर्यावरण पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परम्परा अत्यंत वैज्ञानिक रही है। हमारे तीज-त्योहार, रीति-रिवाज और धार्मिक परम्पराएँ भी विज्ञान से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने तुलसी एवं पीपल की परम्पराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने प्रकृति संरक्षण को संस्कृति से जोड़कर समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाए रखा।
प्रारंभ में निदेशक डॉ. सपना श्रीमाली ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि तकनीकी सत्रों में मुख्य वक्ता डॉ. पृथ्वी सिंह, प्रो. मुकेश श्रीमाली, प्रो. विमल सारस्वत, डॉ. नीरू तलेसरा एवं डॉ. सांत्वना बापना ने वातावरणीय भौतिकी, मौसम पूर्वानुमान और पर्यावरणीय निगरानी के विभिन्न आयामों पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि भारत प्राचीन काल से कृषि प्रधान देश रहा है, जहाँ लोग बादलों की दिशा, हवाओं के रुख और प्राकृतिक संकेतों से मौसम का अनुमान लगाते थे। वहीं आज आधुनिक सैटेलाइट तकनीक और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से मौसम का सटीक पूर्वानुमान संभव हो पाया है, जिससे प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी देकर जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है।
सेमीनार के दौरान पोस्टर एवं शोध पत्र प्रस्तुति प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में प्रत्यक्षा गुप्ता प्रथम, निकिता सोलंकी द्वितीय एवं मंजीत सिंह तृतीय स्थान पर रहे। तकनीकी सत्र प्रतियोगिता में श्याम सिंह राठौड़ प्रथम, बुलबुल द्वितीय एवं विष्णु सेन तृतीय स्थान पर रहे। विजेताओं को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
संयोजक डॉ. योगिता श्रीमाली ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सिद्धिमा शर्मा ने किया, जबकि आभार डॉ. लोकेश सुथार ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. उत्तम प्रकाश शर्मा, डॉ. मंगलश्री दुलावत, डॉ. भावेश जोशी, डॉ. लोकेश सुथार, डॉ. खुशबू जैन, डॉ. पूजा जोशी, सिद्धिमा शर्मा, डॉ. शक्तिका चौधरी, डॉ. ललिमा शर्मा, डॉ. हिमानी वर्मा सहित विभागाध्यक्ष, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
