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तनाव प्रबंधन पर विशेष सेमीनार का आयोजन डॉ. अरविंद मुनि थे मुख्य वक्ता

दयपुर स्थित राजस्थान विद्यापीठ के संघटक एग्रीकल्चर महाविद्यालय में “तनाव प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय विशेष सेमीनार का आयोजन किया गया। आज की तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धी जीवनशैली में बढ़ते तनाव के बीच यह सेमीनार विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बेहद प्रेरणादायी और उपयोगी साबित हुआ।

मुख्य वक्ता जैन गुरू आचार्य डॉ. अरविंद मुनि ने कहा कि “जिसे सहना आ गया, उसे जीना आ गया।” उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेडिटेशन, अध्यात्म, योग और सकारात्मक सोच से जीवन के हर तनाव को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति हँसना भूल गया है और मन की चंचलता ही तनाव का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है।

डॉ. अरविंद मुनि ने युवाओं को सोशल मीडिया और अनावश्यक तुलना से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी क्षमता पहचाननी चाहिए और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपनी दिनचर्या में योग, ध्यान, प्राणायाम, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच को शामिल कर ले, तो तनाव को ऊर्जा में बदला जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता को ईश्वर का स्थान देना, नियमित पूजा-पाठ, परिवार और मित्रों के साथ संवाद बनाए रखना तथा प्रकृति के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, सकारात्मक और तनावमुक्त बनाने का मार्ग भी है। उन्होंने कहा कि योग, ध्यान, पर्यावरण और सकारात्मक चिंतन को अपनाकर ही स्वस्थ समाज का निर्माण किया जा सकता है।

प्रारंभ में प्रो. आईजे माथुर ने अतिथियों का स्वागत करते हुए सेमीनार की जानकारी दी। संचालन डॉ. हरीश चौबीसा ने किया जबकि आभार डॉ. गजेन्द्र माथुर ने जताया। इस मौके पर प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. अमी राठौड, डॉ. लीली जैन, डॉ. एजाज सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

यह सेमीनार विद्यार्थियों के लिए केवल तनाव प्रबंधन का संदेश नहीं, बल्कि बेहतर और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा भी बनकर सामने आया।

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