विद्यापीठ के विधि महाविद्यालय द्वारा ग्रामीण विधिक सहायता शिविर का आयोजन
राजस्थान विद्यापीठक की संघटक इकाई विधि विभाग द्वारा साकरोदा सेंटर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए विधिक सहायता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाना एवं डिजिटल सुरक्षा के प्रति ग्रामीण महिलाओं को सजग बनाना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने सहभागिता करते हुए साइबर सुरक्षा, ऑनलाइन ठगी एवं डिजिटल सतर्कता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं।
शिविर का शुभारंभ कुलाधिपति व कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर, कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत, प्राचार्य डॉ. कला मुणेत, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र जैन, एडवोकेट लोकेश गुर्जर महासचिव, एडवोकेट महेंद्र मेनारिया उपाध्यक्ष एवं डॉ. मीता चौधरी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर उत्कृष्ट विद्यार्थियों को अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और इससे बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता एवं सतर्कता है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी या पासवर्ड साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध लिंक या वेबसाइट पर अपनी निजी जानकारी अपलोड करने से बचें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा की मूलभूत जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने विधि विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक की सराहना करते हुए कहा कि साइबर ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया फ्रॉड एवं ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से समाज तक पहुंचाना एक सराहनीय प्रयास है। इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ लोगों को आत्मरक्षा के प्रति भी सजग बनाते हैं।
कुलाधिपति व कुल प्रमुख भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है, ऐसे में साइबर सुरक्षा की जानकारी देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ डिजिटल रूप से जागरूक बनाना भी जरूरी है ताकि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या भ्रमित करने वाली गतिविधियों का शिकार न हों। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। विधि विभाग द्वारा आयोजित यह शिविर सामाजिक दायित्व, कानूनी शिक्षा एवं जनजागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
बार एसोसिएशन अध्यक्ष एडवोकेट जितेन्द्र जैन ने वर्तमान में हो रहे साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों से ग्रामीण महिलाओं को अवगत कराया तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपाय भी बताए।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए प्राचार्य डॉ. कला मुणेत ने बताया कि विधि विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया धोखाधड़ी एवं डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रित्वि धाकड़ ने किया, जबकि आभार डॉ. प्रतीक जांगीण द्वारा व्यक्त किया गया।
