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विद्यापीठ के संस्थापक जनुभाई की 115वीं जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन

जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के संस्थापक मनीषी पंडित जनार्दनराय नागर “जनुभाई” की 115वीं जयंती पर विद्यापीठ परिवार ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रतापनगर स्थित आईटी सभागार में “जनुभाई एवं नई शिक्षा नीति 2020” विषय पर संगोष्ठी एवं व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ, जिसमें शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण पर गंभीर चिंतन हुआ।

कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि जनुभाई केवल एक शिक्षाविद् नहीं, बल्कि लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, कवि और दूरदर्शी समाज सुधारक थे। उन्होंने आज़ादी से 10 वर्ष पूर्व लालटेन के माध्यम से मेवाड़ में शिक्षा की अलख जगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक केंद्र स्थापित कर शिक्षा को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। प्रो. सारंगदेवोत ने कहा कि आज शिक्षा केवल “इन्फॉर्मेशन” तक सीमित हो गई है, जबकि आवश्यकता इसे “विद्या” में बदलने की है, जो व्यक्ति में नैतिकता, संस्कार और चरित्र निर्माण का भाव जागृत करे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 और जनुभाई का शिक्षा दर्शन दोनों ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, मातृभाषा आधारित शिक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा और कौशल उन्मुख शिक्षा पर समान रूप से बल देते हैं।

कुलाधिपति भंवर लाल गुर्जर ने कहा कि जनुभाई का जीवन शिक्षा, सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज के समग्र विकास का आधार माना। उन्होंने कहा कि पाँच कार्यकर्ताओं और मात्र 3 रुपये के बजट से शुरू हुई यह संस्था आज 10 हजार विद्यार्थियों, लगभग एक हजार कार्यकर्ताओं और 80 करोड़ रुपये के वार्षिक बजट के साथ विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।

संगोष्ठी से पूर्व प्रतापनगर परिसर में स्थापित जनुभाई की आदमकद प्रतिमा पर कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत, कुलाधिपति एवं कुल प्रमुख बीएल गुर्जर, पीठ स्थविर डॉ. कौशल नागदा, रजिस्ट्रार डॉ. तरूण श्रीमाली सहित तीनों परिसरों के कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनके दिखाए मार्ग पर चलने और विद्यापीठ के निरंतर विकास में योगदान देने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर प्रो. मलय पानेरी, प्रो. सरोज गर्ग, प्रो. जीवनसिंह खरकवाल, प्रो. मंजू मांडोत, परीक्षा नियंत्रक प्रो. पारस जैन, प्रो. युवराज सिंह राठौड, डॉ. धमेन्द्र राजौरा, प्रो. अवनीश नागर, प्रो. हेमेन्द्र चौधरी, डॉ. लिली जैन, प्रो. अमी राठौड़, प्रो. सुनिता मुर्डिया, प्रो. रचना राठौड़, प्रो. बीएल श्रीमाली, डॉ. सपना श्रीमाली, डॉ. गुणबाला आमेटा, डॉ. अपर्णा श्रीवास्तव, निजी सचिव केके कुमावत, जितेन्द्र सिंह चौहान, उमराव सिंह राणावत, डॉ. ओम पारीक, डॉ. जयसिंह जोधा, डॉ. धीरेन्द्र सिसोदिया, डॉ. मोहसीन छीपा, भगवती लाल श्रीमाली सहित विद्यापीठ के डीन, डायरेक्टर एवं कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलशेखर व्यास ने किया, जबकि आभार डॉ. कौशल नागदा ने व्यक्त किया।

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